बल किसे कहते हैं ? , बल क्या है? परिभाषा , प्रकार/भेद एवं सिद्धांत : भौतिक विज्ञान।

बल किसे कहते हैं ? , बल क्या है? परिभाषा , प्रकार/भेद एवं सिद्धांत । (Bal Kise Kahate Hain) :

 आपने कभी साइकिल चलाई है, कभी गेंद (Ball) को ऊपर आसमान की ओर फेंका है, कभी ठेले वाले को ठेला (Cart) खींचते देखा है। सड़क (Road) पर गाड़ियों (Vehicles) को चलते हुए देखा है, और आसमान में हवाई जहाज (Airplane / Aircraft) को उड़ते हुए देखा है। ये सभी क्रियाएँ बल (Force) के कारण होती हैं। साइकिल बल (Force) के कारण चलती है, गाड़ी बल (Force) के कारण आगे बढ़ती है, और हवाई जहाज बल (Force) के कारण ऊपर आसमान में उड़ता है।

संसार (World / Universe) में हर कार्य बल के कारण होता है, चाहे वह पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना हो या ग्रहों (Planets) का अपनी कक्षा (Orbit) में चक्कर लगाना। बिना बल (Force) के एक तिनका भी नहीं हिलता। यदि कोई भी चीज क्रियाशील (Active / Moving) है, तो वह बल (Force) के कारण है।

आज हम बल के बारे में विस्तारपूर्वक (In Detail) अध्ययन (Study / Analysis) करेंगे और बल से संबंधित(Related) सभी प्रकार (Types / Kinds) के प्रश्नों (Questions) के उत्तर साझा करेंगे। साथ ही यह भी बताएँगे कि विज्ञान (Science) में बल (Force) का क्या उपयोग है।

Table of Contents

बल की परिभाषा क्या है ? – बल क्या है? 

सामान्य रूप में, खींचना या धकेलना ही बल कहलाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, बल वह भौतिकीय(Physical) कारक है, जो किसी वस्तु की स्थिति (Position) या गतिशीलता (Motion / Rest) में परिवर्तन करता है या उसे बदलने की कोशिश करता है।

उपरोक्त दिनों परिभाषाएँ एक-दूसरे के समानार्थी हैं। आप इनमें से वह परिभाषा याद रख सकते हैं जो आपके लिए सबसे सरल और समझने में आसान लगे।

बल का मात्रक क्या हैं ?  

हर चीज की एक माप होती है, और जिन इकाइयों में उसे मापा जाता है, उन्हें उसका मात्रक (Unit) कहते हैं।

बल (Force) का SI मात्रक न्यूटन (Newton) होता है। बल एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, क्योंकि इसमें परिमाण (Magnitude) और दिशा (Direction) दोनों होते हैं।

जैसे पानी को लीटर में, वजन को किलोग्राम (kg) में, समय को सेकंड (s) में मापा जाता है। उसी तरह बल को “न्यूटन (N)” में मापा जाता है।

अतः बल का SI मात्रक Newton है। Newton का संकेत (Symbol) “N” होता है।

बल कितने प्रकार के होते है ? : Types of Force in Hindi.

भौतिकी के अनुसार, बल (Force) मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।

1. संपर्क बल (Contact Force) : यह वह बल है जो वस्तुओं को छूकर लगाया जाता है।

जैसे: बॉल को हाथ से फेंकना, ठेला धक्का देना, रस्सी खींचना।

2. असंपर्क बल (Non-contact Force) : यह वह बल है जो वस्तुओं को छुए बिना लगाया जाता है।

जैसे : पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण (Gravity), चुंबक का आकर्षण (Magnetic Force)।

इसके अलावा अन्य कई बल है जो सभी मूल रूप से इन दो प्रकारों के बालों के अंतर्गत आते हैं। ये सारे बाल या तो संपर्क बल हैं या असंपर्क बल । इन सब की जानकारी नीचे दी गई है।

गुरुत्वाकर्षण बल क्या है? Gravitational Force in Hindi 

किसी पिंड में उपस्थित वह असंपर्क बल(Uncontact force) जिसके कारण वह किसी वस्तु को अपनी ओर खींचता है, गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।

पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी भी वस्तु को अपनी ओर खींचती है और इसी बल के कारण कोई भी वस्तु पृथ्वी के ओर गिरती है।

जैसे : आपने पेड़ के सूखे पत्ते को जमीन पर गिरते हुए देखें होंगें , वह पत्ते जमीन पर इसलिए गिरते है क्योंकि पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण बल है जो उन पत्ते को अपने ओर खींच लेती हैं।

आप एक गेंद लीजिए और सावधानी से ऊपर की तरफ फेंकिए, गेंद ऊपर कुछ दूर जाने के बाद पुनः पृथ्वी पर आ जाती है । ऐसा गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है।

यदि आपको लगता है कि गुरुत्वाकर्षण बल केवल पृथ्वी में होता है, तो ऐसा नहीं है। यह बल सभी द्रव्यमान वाले पिंडों में उपस्थित होता है। हालाँकि, हमारे अनुभव के अनुसार सबसे अधिक गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी में ही महसूस होता है।

लेकिन इसके अलावा सूर्य , चाँद, ग्रहों तथा छोटे एस्टेरॉइड आदि में हॉट है। सबसे अधिक गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी और सूर्य में होता है।

चुंबकीय बल क्या है ? Magnetic Force in Hindi 

चुंबक (Magnet) वह पदार्थ होता है जो बिना किसी भौतिक संपर्क के लोहे (Iron), स्टील (Steel) तथा कुछ अन्य धातुओं को अपनी ओर आकर्षित (Attract) करता है या किसी दूसरे चुंबक को धकेल (Repel) सकता है।

चुंबक द्वारा लगाया जाने वाला यही बल चुंबकीय बल (Magnetic Force) कहलाता है।

परिभाषा (Definition) : वह बल जिसके कारण एक चुंबक किसी लौह (Iron/Steel) पदार्थ या किसी अन्य चुंबक को अपनी ओर खींचता (Attract) है या दूर धकेलता (Repel) है, उसे चुंबकीय बल (Magnetic Force) कहते हैं।

यदि आप दो चुंबकों को धीरे-धीरे एक-दूसरे के पास ले जाएँ, तो थोड़ी दूरी बचने पर वे झट से एक-दूसरे से चिपक जाते हैं। यह आकर्षण बल (Attractive Force) के कारण होता है।

कई बार ऐसा भी होता है कि जब आप दो चुंबकों को पास लाते हैं, तो वे एक-दूसरे को दूर धकेल देते हैं। यह विकर्षण बल (Repulsive Force) के कारण होता है।

यह सब चुंबक के दो ध्रुवों — उत्तर ध्रुव (North Pole) और दक्षिण ध्रुव (South Pole) — के कारण होता है।

चुंबकीय बल के प्रकार : 

आकर्षण बल क्या है? (Attractive Force)

जब दो चुंबक या एक चुंबक और लोहे का टुकड़ा एक-दूसरे को अपनी ओर खींचते हैं, तो इसे आकर्षण बल कहते हैं।

विकर्षण बल क्या है? (Repulsive Force) :

जब दो चुंबक एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं, तो इसे विकर्षण बल कहा जाता है।

यह तब होता है जब दोनों चुंबकों के एक जैसे ध्रुव (Like Poles)— जैसे उत्तर-उत्तर (N–N) या दक्षिण-दक्षिण (S–S) — पास आते हैं।

विद्युत बल क्या है ? । विद्युत बल किसे कहते है?  Electric Force in Hindi

विद्युत बल वह बल है जो दो विद्युत आवेशों(Charges) के बीच लगता है। यह बल बिना छुए ही किसी वस्तु को खींच सकता है या धक्का दे सकता है।

परिभाषा (Definition) : दो आवेशित वस्तुओं के बीच आकर्षण (खींचने) या विकर्षण (धक्का देने) की क्रिया को विद्युत बल (Electric Force) कहते हैं।

🔵 विद्युत बल कैसे काम करता है? 

विद्युत बल उत्पन्न होने का मुख्य कारण आवेश(Charge) होता है यानी किसी वस्तु में जमा हुए इलेक्ट्रॉन होता है।

यह आवेश दो प्रकार के होते हैं।

  1. धनात्मक आवेश (+)
  2. ऋणात्मक आवेश (–)

विद्युत बल इन्हीं दोनों आवेश के बीच लगता हैं । यदि विपरीत आवेश हो, तो आकर्षण बल उत्पन्न होता है और यदि समान आवेश हो तो विकर्षण बल उत्पन्न होता है।

अर्थात्

विपरीत आवेश (+ –) → एक-दूसरे को खींचते हैं।

समान आवेश (+ + या – –) → एक-दूसरे को धक्का देते हैं। यही खींचने और धकेलने की शक्ति विद्युत बल कहलाती है।

 विद्युत बल के प्रकार : 

1.विद्युत आकर्षण बल (Attractive Force) : जब एक + (धनात्मक) और एक – (ऋणात्मक) आवेश एक-दूसरे को अपनी ओर खींचें , तो यह आकर्षण बल कहलाता है।

जैसे : रगड़ी हुई प्लास्टिक की कंघी कागज के छोटे छोटे टुकड़े को खींच लेती है।

2. विद्युत विकर्षण बल (Repulsive Force) : जब दो समान आवेश वाली वस्तुएँ एक-दूसरे को दूर धकेलें , तो यह विकर्षण बल कहलाता है।

जैसे : दो इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे को हमेशा धक्का देते हैं।

➡️क्यों लगता है?  विद्युत बल।

क्योंकि हर आवेश अपने आसपास विद्युत क्षेत्र (Electric Field) बनाता है। जब दो क्षेत्र आपस में आते हैं → खींचने या धकेलने की क्रिया शुरू होती है। यही Electric Force है।

आवेश जमा हो → विद्युत बने।

दो आवेश पास आएँ → बल लगे।

खींचे → आकर्षण।

धकेले → विकर्षण।

 

घर्षण बल क्या है? । घर्षण बल किसे कहते हैं? Frictional Force in Hindi

घर्षण बल वह बल है जो दो सतहों के आपस में रगड़ने पर, चलने या फिसलने की क्रिया को रोकता है।

सीधी भाषा में— 👉 जब कोई वस्तु चलना चाहे और नीचे की सतह उसे रोकने की कोशिश करे, तो उसी रोकने वाली शक्ति को घर्षण बल कहते हैं।

अथवा जब दो सतहें एक-दूसरे के संपर्क में रहती हैं और उनमें से एक सतह दूसरी की गति को रोकती है या कम करती है, तो इस रोकने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं।

घर्षण बल क्यों लगता है? (Reason)

हर सतह भले ही हमें चिकनी दिखती हो, पर वास्तव में उसमें छोटी-छोटी ऊँच-नीच (खुरदरापन) होती है।

जब दो सतहें रगड़ती हैं, तो ये ऊँच-नीच आपस में फँस जाती हैं → यही फँसाव घर्षण (Friction) पैदा करता है।

घर्षण बल के प्रकार (Types of Friction)

1. स्थैतिक घर्षण बल। Static Friction Force :  जब कोई वस्तु रुकी हुई होती है और हम उसे धक्का लगाते हैं, तो वह तुरंत नहीं चलती।

क्यों?

क्योंकि उसके नीचे एक छिपा हुआ बल काम करता है—स्थैतिक घर्षण बल।

परिभाषा (Definition): जब कोई वस्तु स्थिर (रुकी) हुई हो और उसे चलाने पर जो घर्षण बल उसके गति शुरू करने का विरोध करे, उसे स्थैतिक घर्षण बल (Static Friction) कहते हैं।

मान लीजिए जमीन पर एक भारी बक्सा रखा है।

आप उसे धक्का मारते हैं — लेकिन बक्सा हिलता तक नहीं! इस समय जो अदृश्य बल बक्से को चलने से रोक रहा है, वही है स्थैतिक घर्षण बल हैं।

यह बल तब तक रहता है, जब तक वस्तु हिलना शुरू न कर दे। एक बार जब वस्तु चलने लगे, तब यह बल बदलकर गतिज घर्षण बल (Kinetic Friction) बन जाता है।

स्थैतिक घर्षण की खास बातें : 

  • यह सिर्फ रुकी हुई वस्तु पर लगता है।
  • यह वस्तु को चलने नहीं देता, चाहे आप हल्का धक्का दें।
  • धक्का बढ़ाने पर एक सीमा तक यह बल बढ़ता जाता है।
  • जब आपका लगाया हुआ बल स्थैतिक घर्षण से ज्यादा हो जाता है, तब वस्तु चलने लगती है।

“सड़क पर खड़े स्कूटर को एक बार में धक्का देने से नहीं चलता— पहले स्थैतिक घर्षण को हराना पड़ता है।”

 2. गतिज घर्षण बल क्या है? (Kinetic Friction in Hindi ) : जब कोई वस्तु चल रही होती है, तभी उसके चलने का जो विरोध सतह करती है, उसे गतिज घर्षण बल कहा जाता है। यानी, वस्तु के चलने पर लगने वाला घर्षण = गतिज घर्षण बल हैं।

परिभाषा (Definition): जब कोई वस्तु गति में हो (चल रही हो) और उसके चलने का सतह द्वारा किया गया विरोध घर्षण के रूप में महसूस हो, तो इस घर्षण को गतिज घर्षण बल (Kinetic Friction) कहा जाता है।

जैसे: फर्श पर खिसकता हुआ बक्सा कुछ दूरी जाकर रुक जाता है। यह गतिज घर्षण की वजह से होता है।

सतही तनाव बल क्या है? Surface Tension Force in Hindi 

किसी द्रव (Liquid) की सतह पर मौजूद कण एक–दूसरे को अपनी ओर खींचते हैं, जिससे द्रव की सतह एक खिंची हुई पतली परत जैसा व्यवहार करती है।

द्रव की सतह पर बनने वाली यह खिंचाव वाली शक्ति ही सतही तनाव बल (Surface Tension Force) कहलाती है।

यानी, पानी के ऊपर जो “तनी हुई त्वचा” जैसी परत बनती है, वह सतही तनाव के कारण होती है।

➡️मच्छर पानी पर क्यों नहीं डूबता?

क्योंकि पानी की सतह एक खिंची हुई परत जैसी होती है, जो मच्छर का वजन संभाल लेती है। यही सतही तनाव है।

➡️पानी की बूंद गोल क्यों होती है?

सतही तनाव पानी की सतह को अंदर की ओर खींचता है, जिससे पानी गोल-बूंद के रूप में बन जाता है।ब्लेड या रेजर पानी पर तैर जाता है। अगर ब्लेड को धीरे से रखो तो वह सतही तनाव की वजह से नहीं डूबता।

पेशीय बल क्या है? (Muscular Force)

हम रोजमर्रा के कई काम अपने शरीर की ताकत से करते हैं—जैसे बाल्टी उठाना, दरवाज़ा खोलना, बैग खींचना या खेत में हल चलाना। ये सारे काम तब होते हैं जब हमारी मांसपेशियाँ बल लगाती हैं। शरीर की यही ताकत मिलकर पेशीय बल बनाती है।

परिभाषा (Definition): मांसपेशियों द्वारा किसी वस्तु पर लगाया गया बल, पेशीय बल (Muscular Force) कहलाता है।

Examples :

बाल्टी उठाना — हाथ की मांसपेशियों का लगाया गया बल।

दरवाजा को धक्का देना — शरीर की ताकत यानी पेशीय बल।

बैग खींचना — मांसपेशियों से लगाया गया प्रत्यक्ष बल।

खेती में हल चलाना — किसान अपने शरीर की ऊर्जा से बल लगाता है।

गाय/भैंस को पकड़कर खींचना — पूरी तरह पेशीय बल का उपयोग।

 नाभिकीय बल क्या है? Nuclear Force in Hindi

हमारे आसपास का हर पदार्थ छोटे–छोटे परमाणुओं से बना है और हर परमाणु के बीच एक बहुत ही शक्तिशाली बल छिपा होता है, जो उसके केंद्र (न्यूक्लियस) को मजबूती से बाँधकर रखता है। यही बल इतना ताकतवर है कि पूरे ब्रह्मांड की स्थिरता इसी पर टिकी है। इसे नाभिकीय बल कहते हैं।

परिभाषा (Definition): परमाणु के नाभिक (Nucleus) में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को अत्यंत मजबूती से बाँधकर रखने वाला बल नाभिकीय बल (Nuclear or Strong Force) कहलाता है।

यह प्रकृति(Nature) का सबसे शक्तिशाली बल है।

परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन एक-दूसरे को धक्का देते हैं (क्योंकि सभी धनात्मक होते हैं)। पर नाभिक टूटता नहीं है। क्योंकि एक बहुत ताकतवर बल उन्हें कसकर पकड़े रहता है जो नाभिकीय बल होता है।

➡️परमाणु बम का विस्फोट : नाभिकीय बल जब टूटता है, तब बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है। इसका कारण नाभिकीय बल की अत्यधिक शक्ति है।

➡️ सूर्य की रोशनी : सूरज में होने वाली नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रतिक्रियाएँ इसी नाभिकीय बल के कारण होती हैं और इसी कारण से सूर्य चमकता है।

➡️ परमाणु रिएक्टर : बिजली उत्पादन में नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) का उपयोग होता है, जहाँ नाभिकीय बल टूटने से ऊर्जा मिलती है।

कुल मिलाकर बात यह है कि नाभिकीय बल वह अदृश्य, बेहद शक्तिशाली बल जो परमाणु के नाभिक को टूटने से बचाकर कसकर बाँधे रखता है।

तनाव बल क्या है? Tension Force in Hindi

जब रस्सी, डोरी, तार या चेन को खींचा जाता है, तो उसके अंदर एक अदृश्य खिंचाव बन जाता है। यही खिंचाव किसी भार को पकड़कर रखने, उठाने या खींचने में मदद करता है। रोजमर्रा के कई काम इसी पर निर्भर करते हैं, जैसे बाल्टी खींचना, झूला झुलाना, या सामान उठाना।

परिभाषा (Definition): रस्सी, डोरी या तार के खिंचने पर उसके अंदर उत्पन्न होने वाले खिंचाव के बल को तनाव बल (Tension Force) कहा जाता है।

रस्सी को खींचने पर उसके अंदर जो “ताण” पैदा होता है— यही Tension है। रस्सी दोनों तरफ समान और विपरीत बल लगाकर भार को संभालती है।

जैसे :

कुएँ से पानी की बाल्टी निकालना : रस्सी में जो खिंचाव पैदा होता है—वही तनाव बल है।

  • झूला झूलना : झूले की रस्सियों में बच्चों के वजन के कारण तनाव बल लगता है।
  • टावर या टेंट की रस्सियाँ : हवा के बावजूद टेंट खड़ा रहता है क्योंकि रस्सियों में तनाव बल होता है।
  • क्रेन से भार उठाना : क्रेन के तार में भारी तनाव बल होता है, तभी वह वजन उठा पाता है।

 

संतुलित बल क्या है? Balanced Force in Hindi .

जब किसी वस्तु पर दो विपरीत दिशाओं से बराबर और समान बल लगाया जाता है, तो वस्तु न हिलती है, न उसकी गति बदलती है। इसका मतलब दोनों तरफ से लगने वाला बल एक-दूसरे को खत्म (cancel) कर देता है। ऐसे बलों को संतुलित बल कहा जाता है।

मान लीजिए आप किसी वस्तु पर बल लगाते हैं—यानी उसे धक्का देते हैं या अपनी ओर खींचते हैं। यदि वह वस्तु भी आपके ऊपर उतना ही बल लगाए या आपको उतनी ही ताकत से खींचे, तो दोनों ओर से लगाए गए बल संतुलित हो जाते हैं, यानी बल बराबर हो जाता है। इसी प्रकार के बल को संतुलित बल कहा जाता है।

जैसे : रस्साकशी (Tug of War) : दो टीमें रस्सी खींच रही हैं।

अगर दोनों टीमें 100 न्यूटन का बल बराबर लगाती हैं,

तो रस्सी कहीं नहीं जाती — न इधर, न उधर।

क्योंकि दोनों का बल संतुलित है।

टेबल पर रखा किताब (Book on Table) पर दो बल लग रहे हैं। पहला बल , पृथ्वी किताब को नीचे की ओर खींच रही है (Weight Force) दूसरा टेबल बल किताब को ऊपर की ओर धक्का दे रही है ।

मतलब पृथ्वी किताब को जितनी शक्ति से बल लगाकर अपने ओर खींच रही है , उतना ही शक्ति से टेबल , किताब को पृथ्वी की ओर जाने से रोक देती है। अर्थात टेबल किताब पर पृथ्वी के बराबर बल लगाकर रोक देती हैं। इस प्रकार किताब टेबल पर स्थिर रहता हैं।

यदि वही किताब जमीन पर रखा होता तो , पृथ्वी के सतह किताब पर बल विपरीत बल लगाकर किताब को पृथ्वी के केंद्र की ओर जाने से रोक देती हैं।

असंतुलित बल क्या है? Unbalanced Force in Hindi 

जब किसी वस्तु पर लगने वाले बल बराबर नहीं होते, यानी एक तरफ का बल ज्यादा और दूसरी तरफ का कम होता है। इन्हीं बल के कारण वस्तुओं को गति में लाया जाता है।  ऐसी स्थिति को असंतुलित बल कहा जाता है।

✔ परिभाषा (Definition)  : जब किसी वस्तु पर लगाए गए बलों का मान बराबर न हो और एक बल दूसरे को हरा दे, जिसके कारण वस्तु चलने, रुकने या दिशा बदलने लगे—तो इसे असंतुलित बल (Unbalanced Force) कहते हैं।

मान लीजिए दो लोग रस्सी खींच रहे हैं। अगर एक की ताकत ज्यादा है और दूसरे की ताकत कम है तो ज्यादा ताकत वाला कम ताकत वाले को खींच लेते है या धक्का दे देते है।

मान लीजिए दो लोग रस्सी खींच रहे हैं।

यदि एक व्यक्ति की ताकत ज्यादा है और दूसरे की कम, तो ज्यादा ताकत वाला व्यक्ति रस्सी को अपनी ओर खींच लेता है। क्योंकि दोनों तरफ के बल बराबर नहीं हैं, इसलिए यह असंतुलित बल का उदाहरण है।

बल का प्रभाव : बल क्या प्रभाव उत्पन्न करता है?

1. बल किसी वस्तु के स्थिति में परिवर्तन ला सकता है। अतः यदि कोई वस्तु स्थिर हैं तो इस पर बल लगाकर उन्हें गति में ला सकते है और यदि कोई वस्तु गति में हैं तो उस पर बल लगाकर उन्हें स्थिर कर कर सकते है अर्थात उसे विराम में ला सकते हैं।

2. किसी गतिशील वस्तु पर बल लगाकर उसके स्तिथि में परिवर्तन ला सकते है। जैसे क्रिकेट के खिलाड़ी गतिशील गेंद में बल्ले से बल लगाकर उसके दिशा को बदल देते है और उसके गति में भी परिवर्तन कर देते है।

3. बल किसी वस्तु के आकृति में परिवर्तन ला सकता हैं। जैसे- रूई को दबाकर उसे छोटा कर सकते है। किसी प्लास्टिक के बोतल पर बल लगाकर उसे चिपका सकते है।

निष्कर्ष(Conclusions) : 

इस अध्याय में आपने बल (Force) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया।

हमने जाना कि बल क्या होता है, कैसे कार्य करता है, तथा किसी वस्तु की गति, दिशा और आकृति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

इसके साथ ही बल के विभिन्न प्रकारों—जैसे संतुलित बल, असंतुलित बल, घर्षण बल, चुंबकीय बल, विद्युत बल, पेशीय बल आदि—का सरल और स्पष्ट विवरण भी समझा।।

समग्र रूप से, इस पाठ में बल की परिभाषा से लेकर उसके प्रभावों और प्रकारों तक, वह सभी आधारभूत जानकारियाँ शामिल की गई हैं जो बल की संपूर्ण समझ के लिए आवश्यक हैं।

 

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