व्यंग्य: पागल होने का खरेलू उपाय : Vyang Katha

Vyang Katha

पागल होने का घरेलू उपाय 🤣  :  ध्यान दीजिए : यह लेख केवल व्यंग्य और हास्य के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या किसी राज्य-प्रदेश की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। यदि आप सच में तनावग्रस्त हैं, तो कृपया किसी विशेषज्ञ (Expert) से सलाह लें और स्वास्थ्य का हमेशा … Read more

यदि पक्षी प्रोफेसर और शिक्षक (Teacher) होते तो वह अपने विद्यार्थियों को क्या सिखाते: पक्षियों के नाम और उनकी कला।

Bird name and properties in Hindi

यदि पक्षी प्रोफेसर और शिक्षक (Teacher) होते तो वह अपने विद्यार्थियों को क्या सिखाते: पक्षियों के नाम और उनकी कला। Bird name and properties in Hindi सोचिए जरा, अगर हमारे स्कूल (School) एवं विश्वविद्यालय (University/College) में इंसानों के बजाय पक्षी शिक्षक (Teacher) और प्रोफेसर (Professor) होते, तो पढ़ाई का मजा ही कुछ और होता! हर … Read more

स्वार्थ की दुनिया – प्रेरणा स्रोत कहानी। Prernadayak Kahani

स्वार्थ की दुनिया – प्रेरणा स्रोत कहानी।  Prernadayak kahani : जंगल के एक स्वच्छ तालाब में एक हंस और उसकी पत्नी हंसिनी रहते थे। जंगल की हरियाली, ठंडी हवा और सुकून भरा जीवन—सब कुछ बहुत सुंदर बीत रहा था। एक दिन हंसिनी बोली — “सुनो जी, हर समय यही झील, यही पेड़-पौधे और यही जंगल … Read more

साहित्य कथा – आखिरी इच्छा। साहित्य हिंदी कहानी।

साहित्य कथा(Sahity katha)- आखिरी इच्छा। साहित्य हिंदी कहानी । भोला दास : गांव में चाहे शादी-ब्याह हो, मुंडन हो, जनेऊ हो, या मृत्यु-श्राद्ध—कहीं भी अग्नि प्रज्वलित करनी हो, लकड़ी उठानी हो, या दूल्हे का बारात ले जाना हो—सारा बोझ भोला दास के कंधों पर ही आ टिकता था। वह भी सिर्फ एक कोर भात के … Read more

प्रेरणादायक कथा : सेठ और यमराज ।

प्रेरणादायक कथा(Prernadayak katha) : यमराज और सेठ ।  धनीलाल सेठ जी की गिनती नगर के सबसे रईस लोगों में होती थी। बड़ी दुकानें, जमीनें, गोदाम, बाजारों में कर्ज देने का काम — हर चीज में उनका बोलबाला था। लेकिन सेठ जी जितने धनवान थे, उतने ही भाग्यवान भी थे । “कैसे?” क्योंकि उनकी यमराज से … Read more

मुख्यमंत्री बनने के घरेलू नुस्खे – व्यंग्य साहित्य।

मुख्यमंत्री बनने के घरेलू नुस्खे – व्यंग्य साहित्य।  यह व्यंग्यात्मक लेख हमारे लोकतंत्र की उस हकीकत को उजागर करता है जिसे हम हर चुनाव में देखते हैं, लेकिन अक्सर अनदेखा कर देते हैं। मुख्यमंत्री बनने के नाम पर कैसे नाटक, अभिनय, जातिवाद, गठबंधन की नौटंकी और भावनाओं का शोषण होता है। लेख में बताए गए … Read more

सरकारी नौकरी और पढ़ाई की चक्कर।

सरकारी नौकरी और पढ़ाई की चक्कर( Sarkari Naukri aur padhai) : “पढ़ते-पढ़ते बाल पक गए, पेट निकल गया… लेकिन नौकरी नहीं मिली!” जब मैंने मैट्रिक क्या पास कर लिया, तो मोहल्ले वालों की सलाहें ऐसे बरसने लगीं जैसे मेरी किस्मत की चाबी उन्हीं के पास हो। सुबह-सुबह मेरे घर के दरवाज़े पर ‘शैक्षणिक मीटिंग’ शुरू … Read more