द्रव्यमान किसे कहते हैं? – विज्ञान(Science)

 द्रव्यमान किसे कहते हैं?(Drayman Kise Kahate Hain) : कोई भी वस्तु (Object) या पदार्थ (Substance/Matter) एक या एक से अधिक सामग्री (Material) से मिलकर बना होता है।

जैसे—थाली (Plate), लोटा (Pot), बाल्टी (Bucket), तेल (Oil), पानी (Water), लोहे का बर्तन (Iron utensil), दाल (Pulses), चीनी (Sugar), स्टील (Steel), सोना (Gold), चाँदी (Silver), ताँबा (Copper), एल्यूमीनियम (Aluminium), काँच (Glass) आदि।

उदाहरण के लिए किसी काँच के ग्लास (Glass tumbler) को बनाने में काँच की जितनी मात्रा (Quantity) उपयोग हुई है, वही मात्रा उस ग्लास का द्रव्यमान (Mass) कहलाती है। अर्थात ग्लास में कितना (ग्राम या किलोग्राम) काँच लगा है, वही माप उस ग्लास का द्रव्यमान (Mass) है।

“विज्ञान (Science) के अनुसार, किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ (Matter) की मात्रा को द्रव्यमान (Mass) कहते हैं।”

इसी प्रकार संसार के प्रत्येक पिंड (Body) या वस्तु (Object) में द्रव्यमान (Mass) होता है। आज हम द्रव्यमान के हर पहलुओं के बारे में विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगें ।

द्रव्यमान की परिभाषा क्या है ?

परिभाषा (Definition) : किसी भी वस्तु या पदार्थ को बनाने में जितनी सामग्री लगी होती है, उसी सामग्री की मात्रा को उस वस्तु का द्रव्यमान (Mass) कहते हैं।

दूसरे शब्दों में, किसी वस्तु में कितनी मात्रा में पदार्थ (kg या g) मौजूद है, वही उस वस्तु का द्रव्यमान (Mass) होता है।

द्रव्यमान (Mass) का SI मात्रक किलोग्राम (Kilogram, kg) होता है, जिसे मूल मात्रक (Fundamental Unit) कहा जाता है। इसके अलावा अन्य सामान्य मात्रक हैं-  ग्राम (Gram), क्विंटल (Quintal), टन (Tonn) भी होते हैं ।

द्रव्यमान को उदारहण से समझाए ?

  • 15 kg गेहूं का द्रव्यमान 15 kg होगा।
  • 2 kg तांबा का द्रव्यमान 2 kg ही होगा, क्योंकि उसमें तांबा की मात्रा 2 kg है।
  • 50 kg वाले बड़े लोहे की कड़ाही का द्रव्यमान 50 kg ही होगा, क्योंकि कड़ाही में लोहे की मात्रा 50 kg है।

कुल बात यह है कि –  “किसी वस्तु का द्रव्यमान = उस वस्तु में मौजूद उसकी पदार्थ की मात्रा।”

द्रव्यमान को जानना क्यों आवश्यक है? (Why Knowing Mass is Important)

किसी वस्तु का द्रव्यमान जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे हमें यह पता चलता है कि उस वस्तु में कितना पदार्थ की मात्रा मौजूद है।

अगर आपके पास एक एल्यूमिनियम (Aluminium) का बर्तन है और उसका द्रव्यमान 2kg है, तो इसका मतलब यह है कि उस बर्तन को बनाने में 2 kg एल्यूमिनियम लगा है। इस बर्तन को बनाने वाली कंपनी ने 2kg एल्यूमिनियम लगाया है।

वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए (Use of Scientific Practical)

वास्तव में Physics और Chemistry के कई प्रयोग द्रव्यमान पर आधारित होते हैं। किसी मिश्रण (Mixture) में अलग-अलग पदार्थों की मात्रा जानने के लिए या रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) की गणना करने के लिए द्रव्यमान को मापना आवश्यक है। इसलिए  द्रव्यमान को समझना आवश्यक हैं ।

किसी रासायनिक प्रयोगशाला (Chemical Laboratory) में द्रव्यमान मापकर ही प्रयोग किए जाते हैं, क्योंकि यह सटीकता (Accuracy) सुनिश्चित करता है।

जैसे : यदि हमें 50 g NaCl (साधारण नमक) और 100 g C₆H₁₂O₆ (शुगर) को मिलाकर कोई मिश्रण तैयार करना है, तो द्रव्यमान मापना आवश्यक है , क्योंकि द्रव्यमान का सही मात्रा न लेने पर मिश्रण का अनुपात गलत होगा और प्रयोग असफल हो सकता है।

रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) के लिए । 

यदि हमें पानी बनाना हो तो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का सही द्रव्यमान लेना आवश्यक है , यदि मात्रा गलत लेते है तो पानी नहीं बनेगा और हमारा प्रयोग असफल हो जाएगा।

जड़त्व (Inertia) और गति का अध्ययन (To Study Inertia and Motion)

Newton के नियमों के अनुसार किसी वस्तु की गति बदलने की क्षमता उसके द्रव्यमान पर निर्भर करती है। यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान ज्यादा है तो उसका जड़त्व (Inertia) उतना ही अधिक होगा। यही कारण है कि भारी वस्तु को रोकना या उसकी दिशा बदलना कठिन होता है। लेकिन कम द्रव्यमान वाले वस्तुओं को रोकना आसान होता है।

जैसे : एक छोटे पत्थर को रोकना आसान है, लेकिन लोहे की भारी कुल्हाड़ी को रोकना बहुत ही कठिन होता है। गति और जड़त्व का सीधा संबंध द्रव्यमान से है। इसलिए किसी वस्तु की गति (Motion) समझने और नियंत्रित करने के लिए उसका द्रव्यमान जानना आवश्यक है।

किसी भारी वस्तु को गति में लाना और उसकी दिशा बदलने के लिए ज्यादा बल की आवश्यकता होती है लेकिन ऐसी छोटी जिसका द्रव्यमान कम है उसके लिए कम बल लगाने की आवश्यकता होती है।

मान लीजिए आपके पास दो समान आकार की गेंद हैं।

  1. एक प्लास्टिक की गेंद।
  2. दूसरे लोहे की गेंद।

अब हम इनके गति (Motion) और बल (Force) के फर्क को समझते है :

1. गति बदलने के लिए लगने वाला बल (Force to Change Motion) – Newton के दूसरे नियम (F = m × a) के अनुसार:

किसी वस्तु की गति बदलने के लिए जो बल (Force) लगता है, वह उस वस्तु के द्रव्यमान (Mass) पर निर्भर करता है।

  • द्रव्यमान ज्यादा → ज्यादा बल लगेगा।
  • द्रव्यमान कम → कम बल लगेगा।

इसका मतलब प्लास्टिक गेंद हल्की है → इसे रोकना, फेंकना या दिशा बदलना आसान है। जबकि लोहे की गेंद भारी है → इसे रोकना, फेंकना या दिशा बदलना कठिन है।

2. गति (Speed) पर असर।

हल्की वस्तु (Plastic Ball) जल्दी रुक जाती है, उसकी गति धीरे-धीरे घटती है।

भारी वस्तु (Iron Ball) की गति ज्यादा देर तक बनी रहती है और सही दिशा में फेंकने पर ज्यादा दूरी तय करती है।

जैसे : क्रिकेट में खिलाड़ी भारी गेंद (स्टील या लोहे जैसी) को बड़े आसानी से हल्के से बल्ला दबाने पर गेंद लंबी दूरी तय कर जाते हैं। लेकिन वहीं हल्की गेंद को जोर से बल्ला चलाने पर भी ज्यादा दूर नहीं जाते है। अब आप समझ गए होंगे कि विज्ञान में द्रव्यमान का क्या स्थान है।

 

 

 

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